भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव गंगा नदी डॉल्फिन (Gangetic River Dolphin) है। इसका वैज्ञानिक नाम Platanista gangetica है। इसे आमतौर पर गंगा डॉल्फिन या सुसु भी कहा जाता है। भारत सरकार ने वर्ष 2009 में गंगा नदी डॉल्फिन को राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया था।
गंगा डॉल्फिन की खासियत
गंगा नदी डॉल्फिन मीठे पानी में रहने वाला एक अनोखा स्तनधारी जीव है। यह मुख्य रूप से गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना नदी तंत्र में पाई जाती है। इसकी आंखें बहुत कम विकसित होती हैं, इसलिए यह लगभग अंधी होती है। शिकार और आसपास की वस्तुओं का पता लगाने के लिए यह इकोलोकेशन यानी प्रतिध्वनि निर्धारण का इस्तेमाल करती है।
इसकी एक खास पहचान इसका लंबा और पतला थूथन है। यह अक्सर पानी में एक तरफ झुककर तैरती है, जिसे इसकी अनोखी तैरने की शैली माना जाता है।
इसे राष्ट्रीय जलीय जीव क्यों बनाया गया?
गंगा डॉल्फिन नदी के पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण संकेतक मानी जाती है। इसकी संख्या और स्थिति से नदी के पर्यावरण की गुणवत्ता के बारे में जानकारी मिलती है। इसी कारण इसके संरक्षण को विशेष महत्व दिया गया है।
गंगा डॉल्फिन के सामने खतरे
गंगा डॉल्फिन को IUCN की रेड लिस्ट में Endangered (संकटग्रस्त) श्रेणी में रखा गया है। नदी में प्रदूषण, जल प्रवाह में कमी, बांध और बैराज, मछली पकड़ने के दौरान जाल में फंसना तथा आवास में बदलाव इसके प्रमुख खतरों में शामिल हैं।
इसके संरक्षण के लिए भारत में इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I में शामिल किया गया है, जिससे इसे उच्चतम स्तर की कानूनी सुरक्षा प्राप्त है।
निष्कर्ष
गंगा नदी डॉल्फिन भारत की नदियों की जैव-विविधता और स्वस्थ नदी पारिस्थितिकी का महत्वपूर्ण प्रतीक है। इसे राष्ट्रीय जलीय जीव का दर्जा देकर इसके संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया है। इसलिए गंगा डॉल्फिन का संरक्षण केवल एक जीव की रक्षा नहीं, बल्कि हमारी नदियों और उनके पूरे पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा भी है।
( NO MISTAKE )













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