उत्तर – अपवर्तन , परावर्तन और वर्ण विक्षेपण की प्रक्रिया के कारण बनता है
इंद्रधनुष प्रकृति की सबसे सुंदर और आकर्षक घटनाओं में से एक है। बारिश के बाद आकाश में दिखाई देने वाला रंगों का यह सुंदर धनुषाकार रूप सभी को आकर्षित करता है। इसमें आमतौर पर सात रंग—बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी और लाल दिखाई देते हैं।
इंद्रधनुष कैसे बनता है?
इंद्रधनुष बनने के लिए मुख्य रूप से सूर्य का प्रकाश और हवा में मौजूद पानी की छोटी-छोटी बूंदें जिम्मेदार होती हैं। जब सूर्य का प्रकाश बारिश की बूंदों में प्रवेश करता है, तो प्रकाश की दिशा बदल जाती है। इसे अपवर्तन (Refraction) कहते हैं।
पानी की बूंद के अंदर पहुंचने के बाद सूर्य का सफेद प्रकाश अपने अलग-अलग रंगों में विभाजित हो जाता है। इसे प्रकाश का विक्षेपण (Dispersion) कहा जाता है। इसके बाद प्रकाश बूंद की अंदरूनी सतह से परावर्तित होता है और बाहर निकलते समय फिर से अपवर्तित होता है।
इस प्रक्रिया के कारण हमें आकाश में अलग-अलग रंग दिखाई देते हैं और इंद्रधनुष का निर्माण होता है।
इंद्रधनुष के सात रंग
इंद्रधनुष में दिखाई देने वाले सात प्रमुख रंग हैं:
- लाल
- नारंगी
- पीला
- हरा
- नीला
- जामुनी
- बैंगनी
लाल रंग की तरंगदैर्ध्य सबसे अधिक होती है, जबकि बैंगनी रंग की तरंगदैर्ध्य सबसे कम होती है।
इंद्रधनुष कब दिखाई देता है?
इंद्रधनुष सामान्यतः तब दिखाई देता है जब सूर्य एक दिशा में चमक रहा हो और दूसरी दिशा में बारिश की बूंदें मौजूद हों। इसी कारण बारिश के तुरंत बाद या बारिश के दौरान सूर्य निकलने पर इंद्रधनुष दिखाई देने की संभावना अधिक होती है।
इंद्रधनुष वास्तव में कोई वस्तु नहीं है, बल्कि प्रकाश के अपवर्तन, परावर्तन और विक्षेपण से उत्पन्न एक प्रकाशीय घटना है।
निष्कर्ष
इंद्रधनुष सूर्य के सफेद प्रकाश और पानी की बूंदों के बीच होने वाली प्रकाशीय प्रक्रिया का परिणाम है। पानी की बूंदें छोटे-छोटे प्रिज्म की तरह काम करती हैं और सफेद प्रकाश को अलग-अलग रंगों में विभाजित कर देती हैं। यही रंग मिलकर हमें आकाश में सुंदर इंद्रधनुष के रूप में दिखाई देते हैं।
(NO MISTAKE)













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