भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी: बैरन द्वीप

India’s Only Active Volcano

भारत मुख्य रूप से ज्वालामुखीय गतिविधियों से दूर माना जाता है, लेकिन अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में एक अनोखा भूवैज्ञानिक चमत्कार मौजूद है। बैरन द्वीप (Barren Island) भारत का एकमात्र प्रमाणित सक्रिय ज्वालामुखी है और पूरे दक्षिण एशिया में भी यही एक सक्रिय ज्वालामुखी है।

स्थान और भौगोलिक विशेषताएँ

बैरन द्वीप अंडमान सागर में स्थित है। यह अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की राजधानी श्री विजया पुरम (पूर्व में पोर्ट ब्लेयर) से लगभग 135 से 140 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में है। द्वीप का क्षेत्रफल लगभग 8 से 10 वर्ग किलोमीटर है। समुद्र तल से इसकी ऊँचाई करीब 354 मीटर है, लेकिन समुद्र की गहराई से यह लगभग 2,000 से 2,250 मीटर ऊपर उठता है। यह एक स्ट्रेटोवोलकैनो (मिश्रित ज्वालामुखी) है, जिसमें केंद्रीय शंकु और कैल्डेरा जैसी संरचनाएँ पाई जाती हैं।

यह द्वीप पूरी तरह निर्जन (uninhabited) है। यहाँ स्थायी मानव बस्ती नहीं है। केवल कुछ पक्षी और जंगली बकरियाँ पाई जाती हैं। इसका नाम “बैरन” (बंजर) इसलिए पड़ा क्योंकि यहाँ वनस्पति और जीवन बहुत कम है।

भूवैज्ञानिक महत्व

बैरन द्वीप भारतीय प्लेट और बर्मी (या सुंडा) प्लेट की सीमा पर स्थित है। यहाँ भारतीय प्लेट बर्मी प्लेट के नीचे धंसती है (सबडक्शन जोन), जिससे मैग्मा ऊपर आता है और ज्वालामुखीय गतिविधि होती है। यह सुमात्रा से म्यांमार तक फैली ज्वालामुखीय चाप (volcanic arc) का हिस्सा है।

विस्फोटों का इतिहास

  • पहला दर्ज विस्फोट: 1787 में।
  • उसके बाद 1789, 1795, 1803 और 1852 के आसपास भी गतिविधियाँ दर्ज हुईं।
  • लगभग 150 वर्षों की नींद के बाद 1991 में यह फिर सक्रिय हुआ। यह विस्फोट लगभग छह महीने चला और काफी उल्लेखनीय था।
  • इसके बाद 1994-95, 2005-07, 2017-19, 2022 और हाल के वर्षों में भी गतिविधियाँ हुईं।
  • 2025 में भी सितंबर में हल्के विस्फोट दर्ज किए गए, जिनमें धुआँ और लावा की गतिविधि देखी गई।

ये विस्फोट आमतौर पर स्ट्रॉम्बोलियन या हवाईयन प्रकार के होते हैं—मध्यम तीव्रता के, जिनमें राख के गुबार, लावा प्रवाह और गैस निकलती है। विस्फोटों की तीव्रता वोल्कैनिक एक्सप्लोसिविटी इंडेक्स पर कम रहती है।

पर्यटन और सुरक्षा

बैरन द्वीप पर पैदल जाना या उतरना आमतौर पर प्रतिबंधित है, क्योंकि यह सक्रिय ज्वालामुखी है और पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र है। पर्यटक नौका या क्रूज से दूर से ही इसे देख सकते हैं। हाल के वर्षों में पोर्ट ब्लेयर से बैरन द्वीप की तरफ क्रूज सेवाएँ शुरू हुई हैं, जिनमें द्वीप को समुद्र से देखने का मौका मिलता है। सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के बीच माना जाता है।

वैज्ञानिक महत्व

यह ज्वालामुखी वैज्ञानिकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। भूवैज्ञानिक सर्वे ऑफ इंडिया, नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी और उपग्रह निगरानी (जैसे NASA और VAAC) इसकी लगातार निगरानी करते हैं। इसकी दूरस्थता और निर्जन स्थिति के कारण मानव जीवन को खतरा कम रहता है, जिससे अध्ययन आसान होता है।

निष्कर्ष

बैरन द्वीप भारत की भूवैज्ञानिक विविधता का एक जीवंत उदाहरण है। यह याद दिलाता है कि हमारे देश की प्रकृति कितनी विविध और शक्तिशाली है। सक्रिय होने के बावजूद यह प्रकृति प्रेमियों और वैज्ञानिकों दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। अगर आप कभी अंडमान जाएँ, तो दूर से ही सही, इस अनोखे ज्वालामुखी को देखने का मौका जरूर लें—लेकिन हमेशा सुरक्षा नियमों का पालन करें।

( NO MISTAKE )

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