भारतीय सेना ने ड्रोन से बढ़ते खतरे से निपटने के लिए स्वदेशी ‘SAKSHAM’ (सक्षम) एंटी-ड्रोन ग्रिड की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यह एक आधुनिक Counter-Unmanned Aerial System (C-UAS) कमांड और कंट्रोल नेटवर्क है, जिसे ड्रोन खतरों की निगरानी और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए तैयार किया गया है।
SAKSHAM का मुख्य उद्देश्य
SAKSHAM का मुख्य उद्देश्य दुश्मन के ड्रोन और अन्य मानवरहित हवाई प्रणालियों (UAS) का रियल-टाइम में पता लगाना, उन्हें ट्रैक करना, पहचानना और निष्क्रिय करना है। इससे युद्धक्षेत्र में हवाई खतरों की जानकारी तेजी से मिल सकेगी और सेना समय पर कार्रवाई कर सकेगी।
SAKSHAM का पूरा नाम
SAKSHAM का पूरा नाम Situational Awareness for Kinetic Soft and Hard Kill Assets Management है। यह सिस्टम सॉफ्ट-किल और हार्ड-किल दोनों तरह की ड्रोन-रोधी क्षमताओं को एकीकृत करने के लिए बनाया गया है।
यह कैसे काम करता है?
SAKSHAM विभिन्न सेंसर, रडार और अन्य निगरानी प्रणालियों से मिलने वाली जानकारी को एक नेटवर्क में जोड़ता है। इससे सेना को आसपास के हवाई क्षेत्र की एक एकीकृत तस्वीर (Recognised UAS Picture) मिलती है और संदिग्ध ड्रोन की पहचान व निगरानी आसान होती है।
सॉफ्ट-किल और हार्ड-किल क्या हैं?
सॉफ्ट-किल तकनीकों में ड्रोन के संचार या नेविगेशन को बाधित करके उसे नियंत्रित करने की क्षमता को प्रभावित किया जाता है। वहीं हार्ड-किल में ड्रोन को भौतिक रूप से नष्ट करने वाली प्रणालियों का इस्तेमाल किया जाता है।
3,000 मीटर तक हवाई क्षेत्र पर नजर
SAKSHAM को टैक्टिकल बैटलफील्ड स्पेस (TBS) में कम ऊंचाई वाले हवाई क्षेत्र की सुरक्षा मजबूत करने के लिए तैयार किया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार यह क्षेत्र जमीन से लगभग 3,000 मीटर तक माना गया है।
निष्कर्ष
संक्षेप में, SAKSHAM का मुख्य उद्देश्य दुश्मन के ड्रोन और UAS खतरों को रियल-टाइम में detect, track, identify और neutralise करना है। यह भारतीय सेना की ड्रोन-रोधी क्षमता और कम ऊंचाई वाले हवाई क्षेत्र की सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
(NO MISTAKE)













Leave a Reply