भारत ने स्वच्छ और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट (GW) गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित विद्युत क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। यह लक्ष्य भारत की ऊर्जा नीति और जलवायु प्रतिबद्धताओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
क्या है गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा?
गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा में मुख्य रूप से सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल विद्युत, जैव ऊर्जा और परमाणु ऊर्जा शामिल हैं। इन स्रोतों पर निर्भरता बढ़ाने से कोयला और पेट्रोलियम जैसे जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलती है।
500 GW का लक्ष्य
भारत सरकार ने 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित विद्युत क्षमता का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके साथ भारत ने 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करने की प्रतिबद्धता भी जताई है।
भारत इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, 31 जुलाई 2026 तक देश की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित विद्युत क्षमता 300.50 GW हो चुकी थी, जो 500 GW के लक्ष्य का 60 प्रतिशत से अधिक है। इसमें सौर ऊर्जा की क्षमता 164.59 GW और पवन ऊर्जा की क्षमता 58.14 GW थी।
लक्ष्य क्यों महत्वपूर्ण है?
500 GW गैर-जीवाश्म विद्युत क्षमता का लक्ष्य भारत के लिए कई कारणों से महत्वपूर्ण है। इससे स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा, कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिलेगी और देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। इसके अलावा, नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
भारत सरकार ने 2030 तक इस क्षमता को ग्रिड से जोड़ने के लिए बड़े पैमाने पर ट्रांसमिशन नेटवर्क और ऊर्जा भंडारण व्यवस्था विकसित करने की योजना बनाई है।
निष्कर्ष
इसलिए, भारत ने वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट (GW) गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित विद्युत क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। यह लक्ष्य भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन और दीर्घकालिक जलवायु लक्ष्यों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
(NO MISTAKE)













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